Sunday, September 2, 2012

baarish!!


बारिश आई , बारिश आई,
खुशियाँ ही खुशियाँ लायी,
काश रोज़ बारिश हो, 
काम बंद और पूरा आराम हो | 
 
झूमने लगे, कूद पड़े, बरखे की आनंद में, 
बनाके कश्तियाँ अखबार की, 
रेस लगाने की होड़ चली,
आँचल के तौलिये, गरम पकौड़े,
स्कूल की छुट्टी, धमाचौकरी, है बरखे की आनंद में|

बारिश आई , बारिश आई,
ग़मों की सौगाद लायी,
आज फिर मंदा धंधा होगा,
खाली पेट फिर सोना होगा |

फिर बारिश हुई, पानी है हर जगह,
तन भींगा, सर्द मौसम है,
अब तो बिछौने भी गिले हैं,
फूटपाथ ही सहारा था, पर अब,
आशियाना नहीं कहीं, पानी है हर जगह |


Sunday, March 25, 2012

Raahi...

नज़र नज़र का फेर यही
निशा नहीं सवेर सही
कभी रस, नीरस कभी
रुक भला, पर चल सही.
डगर कठिन, पर राह यही.
चलत मुसाफिर, मिलेगी मंजिल अभी

सुर्ख डालों में जब कभी
चहक गूंजती है कहीं
चमक पात पात की
कुंदन सी खिलती है नयी
जीवन की सोच नविन
मिलती पल-पल तुझसे साथी अभी ||